रिलायंस ने राफेल डील पर पहली बार दी सफाई, कहा- रक्षा मंत्रालय से नहीं मिला कोई सौदा

रिलायंस ने राफेल डील पर पहली बार दी सफाई, कहा- रक्षा मंत्रालय से नहीं मिला कोई सौदा


रिलायंस कंपनी ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि कंपनी को राफेल डील में हिस्सा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नजदीकियां के कारणों से मिला है.

नई दिल्लीः राफेल सौदे पर उठ रहे सवालों और विवादों के बीच पहली बार रिलायंस कंपनी ने अपना पक्ष सामने रखा है. अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस एंड एयरोस्पेस की तरफ से कंपनी के सीईओ ने सभी सवालों के सिलसिलेवार ढंग से जवाब देते हुए कहा है कि कंपनी का रक्षा मंत्रालय से किसी भी तरीके का ना तो कोई करार हुआ है और ना ही कोई सौदा रक्षा मंत्रालय से मिला है. कंपनी का करार राफेल लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनी, दसॉल्ट से ‘ऑफसेट ऑब्लिगेशन’ यानि जिम्मेदारी पूरी करने के लिए हुआ है. साथ ही कंपनी ने कहा कि दसॉल्ट को ये जिम्मेदारी सितंबर, 2019 में पूरी करनी है इसलिए हो सकता है कि फ्रांस की दसॉल्ट कंपनी ने इसकी जानकारी रक्षा मंत्रालय को अभी तक नहीं दी हो.

साथ ही रिलायंस कंपनी ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि कंपनी को राफेल डील में हिस्सा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नजदीकियां के कारणों से मिला है. कंपनी के सीईओ राजेश कुमार ढींगरा के मुताबिक, विदेशी वेंडर (कंपनी) को पूरा अधिकार है कि वो ऑफसेट जिम्मेदारियों के लिए किसी भी भारतीय कंपनी को चुन सकती है, उसमें सरकार या फिर रक्षा मंत्रालय का कोई दखल नहीं होता है. ये बात रक्षा मंत्रालय की डिफेंस प्रोक्यरमेंट पॉलिसी में साफ तौर से दर्ज है. इस नियम के तहत साल 2005 से (यानि जब से विदेशी सौदों में ‘ऑफसेट ऑब्लिगेशन’ शामिल किया गया है) 50 से ज्यादा ऑफसेट कांट्रेक्ट साइन हो चुके हैं.

अरूण शौरी, प्रशांत भूषण और यशवंत सिन्हा के सवालों का भी दिया जवाब
रिलायंस कंपनी ने बुधवार को अरूण शौरी, प्रशांत भूषण और यशवंत सिन्हा की प्रेस कांफ्रेंस में उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया है. कंपनी ने कहा है कि रिलायंस को 36 राफेल लड़ाकू विमान सौदे में किसी भी तरीके का कोई कांट्रेक्ट नहीं मिला है. इस सवाल के जवाब में की रिलायंस को विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है, सीईओ ने कहा कि राफेल सौदे में सभी 36 लड़ाकू विमान सीधे फ्लाई-वे स्थिति में फ्रांस से खरीदे जा रहे हैं, ऐसे में विमान निर्माण या बनाने का कोई सवाल ही खड़ा नहीं होता. क्योंकि भारत में इन 36 लड़ाकू विमानों को बनाना ही नहीं जा रहा है.

राफेल सौदे से ठीक दस दिन पहले रिलायंस कंपनी खड़ी करने के सवाल में कहा गया है कि ऑफेसट जिम्मेदारी पूरी करने के लिए दसॉल्ट-रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड कंपनी को फरवरी 2017 में बनाया गया था. इससे पहले रिलायंस ग्रुप ने साल 2015 में ही रिलायंस डिफेंस नाम की कंपनी के जरिए डिफेंस इंडस्ट्री में अपना कदम रख दिया था.

रिलायंस ने कहा कि ये भी कहना गलत है कि हमारी कंपनी को ऑफसेट करार का करीब 30 हजार करोड़ रुपया मिल रहा है. कंपनी ने कहा कि हमें सिर्फ इसका 25 फीसद ही मिल रहा है. दसॉल्ट के साथ हुए इस ऑफसेट करार में और भी दूसरी कंपनियां हैं (थेल्स, साफरान, एमबीडीए इत्यादि).

फ्रांस के जिस दौरे पर पीएम मोदी ने राफेल सौदे की घोषणा की थी उस दौरान अनिल अंबानी के भी वहां मौजूद होने पर कंपनी ने कहा कि अनिल अंबानी सीईओ फोरम फोर फ्रांस सहित कई और संगठनों के सदस्य हैं. वे पेरिस में इसलिए थे क्योंकि वहां पर सीईओ फोरम की मीटिंग होनी थी. इस मीटिंग में एचएएल सहित 25 कंपनियों के सीईओ मौजूद थे.

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