परिवार सहित बैठे धरने पर शिक्षाकर्मी खुले आसमान के नीचे अपनी मांगों को लेकर लगातार 8 दिन से डटे मैदान में

अंबिकापुर. शिक्षाकर्मी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर आठंवे दिन परिवार सहित धरने पर खुले आसमान के नीचे दिनभर बैठे रहे। वहीं जिला पंचायत सभाकक्ष में सोमवार को कलक्टर की पहल पर स्वैच्छिक रूप से पढ़ाने के लिए आयोजित वॉक-इन-इंटरव्यू में सैकड़ों युवा पहुंचे थे। प्रशासन की पहल पर 1528 युवाओं ने स्वेच्छा से स्कूलों में विद्यादान करने की बात कही है।

शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के आह्वान पर लगातार 8 दिनों से शिक्षाकर्मी स्कूलों का बहिष्कार कर हड़ताल पर बैठे हुए हैं। दो दिन पूर्व प्रशासन द्वारा शिक्षाकर्मियों के धरने स्थल पर लगे तंबू को उखाड़ दिए जाने के बाद सभी आंदोलनकारी शिक्षाकर्मी छतरी लगाकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सोमवार को आठवें दिन शिक्षाकर्मियों ने परिवार के सदस्यों के साथ दिनभर धरने पर बैठे रहे। इस दौरान शिक्षाकर्मियों ने बुजुर्ग सदस्यों का सम्मान किया।
जिला संचालक सर्वजीत पाठक, मनोज वर्मा एवं राकेश वर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि जिला में जनपद पंचायत द्वारा कक्षा 12वीं उत्तीर्ण भोले-भाले ग्रामीणों को शिक्षाकर्मियों के विकल्प के तौर पर अवैतनिक भर्ती कर नवयुवकों के भविष्य के साथ सरकार खिलवाड़ न करे और उन्हें अपनी उच्च शिक्षा पूर्ण करने दे। यदि प्रशासन में साहस है तो वह जिले के समस्त शिक्षाकर्मियों को एक साथ बर्खास्त कर नए लोगों की भर्ती कर ले और केवल विद्यालय संचालित न करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी देने का भी प्रयास करे ।
तभी शासन को हमारा महत्व समझ में आएगा कि किस प्रकार से शिक्षाकर्मी अभाव में जीवन यापन करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने मे अपना योगदान दे रहे हैं ।
इस दौरान सह संचालक हरेन्द्र सिंह व सुनील सिंह ने संयुक्त विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि जिले के सातों विकासखण्ड के समस्त शिक्षाकर्मी प्रशासन के तुगलकी फरमान की परवाह न करते हुए अपने परिवार के साथ हड़ताल मे उपस्थित रहते हुए एक स्वर में प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की और अपनी मांगों के पूरा होते तक हड़ताल पर अडिग रहेंगे।
शिक्षाकर्मियों की हड़ताल का सोमवार को धरना स्थल पर पहुंचकर स्वास्थ्य कर्मचारी संघ व छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज ने समर्थन किया। इस दौरान जलजीत सिंह, आनंद तिर्की, नेहेमियस कुजूर, ओमप्रकाश गुप्ता, ने उपस्थित होकर अपना लिखित समर्थन दिया।

बीएड व डीएड डिग्री के ज्यादा युवा
विद्यादान देने वाले युवाओं में ज्यादातर युवा बीएड व डीएड जैसी डिग्रियों के साथ जिला पंचायत सभाकक्ष पहुंचे थे। सीईओ अनुराग पाण्डेय ने युवाओं को इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे बच्चों के साथ संवेदनशील होकर व्यवहार करें। बच्चों को निबंध, सुलेख, सामान्य ज्ञान, पत्र लेखन, अंग्रेजी का अध्ययन कराएं। अगर कोई पढ़ाने से रोकता है तो वे इसकी शिकायत कर सकते हैं।
कार्य में बाधा पहुंचाने वाले के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। युवाओं से कहा कि प्रशासन की ओर से एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा। इसका लाभ भविष्य में होने वाली भर्ती के दौरान उन्हें मिलेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस विद्यादान के बदले उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाएगा। वे जबतक चाहें अपनी सेवाएं स्कूल में दे सकते हैं।

1528 ने जताई नि:शुल्क पढ़ाने की इच्छा
कलक्टर किरण कौशल की पहल पर जिले के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था न बिगड़े। इसे ध्यान में रखते हुए उनके आदेश पर सोमवार को जिला पंचायत द्वारा सोमवार को ग्रामीण क्षेत्र की शालाओं में अध्यापन हेतु वॉक-इन-इंटरव्यू का आयोजन किया गया था।
इसमें कक्षा 12वीं व उच्च शिक्षा योग्यताधारी स्थानीय युवाओं को स्वैच्छिक रूप से अध्यापन कार्य करने हेतु आमंत्रित किया गया था। विभिन्न विकासखंड के 1528 युवा इंटरव्यू में शामिल हुए। सुबह 12 बजे तक युवाओं का सैलाब जिला पंचायत सभाकक्ष में उमड़ पड़ा था।
जिनके दस्तावेजों की जांच करने के बाद जिला पंचायत सीईओ अनुराग पाण्डेय ने युवाओं को जरूरी निर्देश दिए और उन्हें स्पष्ट किया कि आप बिना किसी पारिश्रमिक के पढ़ायेंगे। दस्तावेजों की जांच करने के बाद युवाओं को गुलाब का फूल देकर पढ़ाने के लिए रवाना किया गया।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने ली क्लास
जिला पंचायत अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह ने सोमवार को ग्राम पंचायत बरढोढ़ी के पूर्व माध्यमिक व प्राथमिक स्कूल पहुंचकर बच्चों की क्लास ली। उन्होंने हिन्दी के शब्दों को लिखना व वाक्य बनाना बच्चों को सिखाया। इसके साथ ही बच्चों के सामान्य ज्ञान की जांच भी की। हिन्दी के अक्षरों को दिखाकर उसके बारे में बच्चों से पूछा। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को अंग्रेजी का पाठ भी पढ़ाया।

स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न होने देना प्राथमिकता
शिक्षाकर्मियों की हड़ताल को देखते हुए हमारी पहली प्राथमिकता है कि स्कूलों में पढ़ाई बाधित न हो। पहले प्राथमिक स्कूल में अध्यापन कराया जाएगा। सुचारू रूप से पढ़ाई संचालित हो यह प्रशासन का उद्देश्य है।
किरण कौशल,कलेक्टर सरगुजा

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