ट्राई ने बदला नियम, 500 रुपए महीने से ज्यादा हो सकता है केबल कनेक्‍शन का बिल !

मुंबई।

केबल ऑपरेटरों को ग्राहकों की अलग-अलग वरीयता टैब में रखना होगा और उसी के मुताबिक पैसा कलेक्ट करना होगा। ऐसा करने के लिए उन्हें अतिरिक्त मैन पावर की आवश्यकता होगी, इससे ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी होगी। मुंबई में लगभग 15 से 20 लाख केबल उपभोक्ता हैं, और वर्तमान में इस बिजनेस से हर वर्ष 900 करोड़ रुपये का राजस्व आता है। नई दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) के नए निर्देशों के कारण आपका केबल बिल 350 रुपये प्रति माह से बढ़कर 500 रुपये प्रति तक माह से अधिक होने की संभावना है।

नए दिशानिर्देशों के तहत, 100 फ्री-टू-एयर चैनल देखने के लिए ग्राहक को 130 रुपये प्रति माह का फिक्स चार्ज देना ही होगा। इसके ऊपर प्रत्येक चैनल के लिए प्रति चैनल 2 से 19 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। ज्यादातर पॉपुलर चैनल देखने के लिए लगभग 15 रुपये प्रति चैनल खर्च करने होंगे। मुंबई में लगभग 15 से 20 लाख केबल उपभोक्ता हैं, और वर्तमान में इस बिजनेस से हर वर्ष 900 करोड़ रुपये का राजस्व आता है।
मिली जानकारी के मुताबिक मनसे केबल सेना के महासचिव तुषार एफले ने कहा, “इससे पहले, क्षेत्र के आधार पर, केबल ऑपरेटर प्रत्येक महीने 350 रुपये और 450 रुपये के बीच चार्ज करते थे और लगभग 458 चैनल दिखाते थे। हालांकि, ट्राई के दिशानिर्देशों के कारण, स्टार, सोनी, जी, कलर्स इत्यादि जैसी प्रसारण कंपनियां अपने चैनल को एक ही बैनर में नहीं दे पाएंगी, और प्रत्येक चैनल के लिए अलग-अलग शुल्क लेंगी। “इससे बिल बढ़ेगा एफले ने कहा कि कम से कम 500 रुपये प्रति माह तक चार्ज करेंगे।
इसके अलावा, केबल ऑपरेटरों को ग्राहकों की अलग-अलग वरीयता टैब में रखना होगा और उसी के मुताबिक पैसा कलेक्ट करना होगा। ऐसा करने के लिए उन्हें अतिरिक्त मैन पावर की आवश्यकता होगी, इससे ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी होगी। मनसे केबल सेना ने ट्राई को एक ज्ञापन सौंपा है कि वह कम से कम एक साल तक अपने फैसले को स्थगित कर दे, और इस बीच शुल्क लेने के लिए उपयुक्त तंत्र पर नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करें। देश भर में कार्य कर रहीं सभी डीटीएच और केबल कंपनियां दो तरफ से कमाई करती हैं। वो ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों से भी चैनल को दिखाने के लिए पैसा लेती हैं, वहीं ग्राहकों से भी पैकेज लेने के नाम पर शुल्क वसूलती हैं। ग्राहकों से मासिक, तिमाही, छमाही और वार्षिक आधार पर शुल्क लिया जाता है। वहीं ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों से एक साल के लिए सभी चैनलों का पैसा लिया जाता है।

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